पेप्सी बोली ‘कोका कोला’ ! भारत का इन्सान है भोला ।
विदेश से मैं आयी हूँ, साथ मैं मौत को लायी हूँ ।
लहर नहीं ज़हर हूँ मैं, गुर्दों पर बढ़ता कहर हूँ मैं ।
मेरी PH 2.7, मुझ में गिर कर घुल जायें दाँत ।
जिंक आर्सेनिक लेड हूँ मैं, काटे आँतों को, वो ब्लेड हूँ मैं ।
मुझसे बढ़ती एसिडिटी, फिर क्यों पीते आपके भैया-दीदी ?
ऐसी मेरी कहानी है, मुझसे अच्छा तो पानी है
दूध मुझसे सस्ता है, फिर पीकर मुझको क्यों मरता है ? ।
दूध दवा है, दूध दुआ है, मैं जहरीला पानी हूँ ।
540 करोड़ कमाती हूँ, अपने ‘अमरीका’ ले जाती हूँ ।
शिव ने भी ना जहर उतारा, कभी अपने कंठ के नीचे !
तुम मुर्ख नादान हो यारों पड़े हो मेरे पीछे !
देखो इन्सा लालच में अँधा , बना लिया है मुझको धंधा !
में पहुंची हूँ आज वहां पर पीने का नहीं पानी जहाँ पर !
छोडो नक़ल अब अकल से जीयो, जो कुछ पीना है संभल के पीयो !
इतना रखना अब तुम ध्यान, घर आयें जब मेहमान !
इतनी तो रस्म निभाना उनको भी कसम दिलाना !
दूध जूस गाजर रस पीना डाल कर छाछ में जीरा पुदीना !
अनानास आम का अमृत , बेदाना बैफल का शरबत !
स्वास्थ्यवर्धक नींबू का पानी, जिसका नहीं है कोई सानी !
तुम भी पीना और पिलाना, पेप्सी नहीं अब घर में लाना|
अब तो समझो मेरे बाप, बचे स्टॉक से करो टोइलेट साफ़ !
नहीं तो होगा वो अंजाम, कर दूंगी मैं काम तमाम |
---- Your silent killer, right in your home.. ironically enjoying your fridges - 'Pepsi and the Soft drinks family' :)
Friday, October 14, 2011
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