Friday, October 14, 2011

Pepsi boli ..

पेप्सी बोली ‘कोका कोला’ ! भारत का इन्सान है भोला ।

विदेश से मैं आयी हूँ, साथ मैं मौत को लायी हूँ ।

लहर नहीं ज़हर हूँ मैं, गुर्दों पर बढ़ता कहर हूँ मैं ।

मेरी PH 2.7, मुझ में गिर कर घुल जायें दाँत ।

जिंक आर्सेनिक लेड हूँ मैं, काटे आँतों को, वो ब्लेड हूँ मैं ।

मुझसे बढ़ती एसिडिटी, फिर क्यों पीते आपके भैया-दीदी ?

ऐसी मेरी कहानी है, मुझसे अच्छा तो पानी है

दूध मुझसे सस्ता है, फिर पीकर मुझको क्यों मरता है ? ।

दूध दवा है, दूध दुआ है, मैं जहरीला पानी हूँ ।

540 करोड़ कमाती हूँ, अपने ‘अमरीका’ ले जाती हूँ ।

शिव ने भी ना जहर उतारा, कभी अपने कंठ के नीचे !

तुम मुर्ख नादान हो यारों पड़े हो मेरे पीछे !

देखो इन्सा लालच में अँधा , बना लिया है मुझको धंधा !

में पहुंची हूँ आज वहां पर पीने का नहीं पानी जहाँ पर !

छोडो नक़ल अब अकल से जीयो, जो कुछ पीना है संभल के पीयो !

इतना रखना अब तुम ध्यान, घर आयें जब मेहमान !

इतनी तो रस्म निभाना उनको भी कसम दिलाना !

दूध जूस गाजर रस पीना डाल कर छाछ में जीरा पुदीना !

अनानास आम का अमृत , बेदाना बैफल का शरबत !

स्वास्थ्यवर्धक नींबू का पानी, जिसका नहीं है कोई सानी !

तुम भी पीना और पिलाना, पेप्सी नहीं अब घर में लाना|

अब तो समझो मेरे बाप, बचे स्टॉक से करो टोइलेट साफ़ !

नहीं तो होगा वो अंजाम, कर दूंगी मैं काम तमाम |

---- Your silent killer, right in your home.. ironically enjoying your fridges - 'Pepsi and the Soft drinks family' :)

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